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पिठौरिया मंडा पूजा में आस्था का ज्वार, दहकते अंगारों पर नंगे पैर चले शिवभक्त।।

IMG 20260529 WA0085पिठौरिया मंडा पूजा में आस्था का ज्वार, दहकते अंगारों पर नंगे पैर चले शिवभक्त।।

रिपोर्टर/राशीद अंसारी

पिठौरिया। पिठौरिया स्थित महादेव मंडा पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित शिव मंडा पूजा श्रद्धा, भक्ति और लोक परंपरा के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुई। आयोजन में 251 भोक्ताओं एवं 301 सोक्ताओं ने कठिन व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की आराधना की। बुधवार को लोटन अनुष्ठान के उपरांत फुल कुंडी कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें भोक्ताओं ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी अटूट श्रद्धा और शिवभक्ति का परिचय दिया। “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।

दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंडा पूजा की अनूठी परंपरा का दर्शन कर पूजा-अर्चना की। रात्रि में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया (झालदा) से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक छऊ नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“झूलन कार्यक्रम बना मुख्य आकर्षण”

शुक्रवार को आयोजित झूलन कार्यक्रम मंडा पूजा का प्रमुख आकर्षण रहा। पारंपरिक महिला वेशभूषा में सजे भोक्ताओं ने ऊंचे लठ के सहारे झूलते हुए श्रद्धालुओं पर आस्था के फूल बरसाए। मान्यता है कि इन फूलों को अपने आंचल में लेने से सुख-समृद्धि और खुशहाली प्राप्त होती है। फूल लेने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। वहीं नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर देर रात तक लोगों को झुमाया।

“नागवंशी काल से जुड़ी है मंडा पूजा की परंपरा”

इतिहासकार एवं पिठौरिया पंचायत समिति सदस्य श्रवण गोप ने बताया कि मंडा पूजा की शुरुआत नागवंशी राजाओं के शासनकाल में हुई थी। नागवंशी शासक भगवान शिव के परम उपासक माने जाते थे और उन्होंने ग्रामीण समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षण दिया। मंडा पूजा को त्याग, तपस्या और लोक-संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पूजा माता सती के आत्मबलिदान की स्मृति में की जाती है। भक्त अग्नि-परीक्षा जैसे कठिन अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी श्रद्धा और आत्मसंयम का प्रदर्शन करते हैं।

झारखंड की लोक संस्कृति में मंडा पूजा आदिवासी और सदानी परंपराओं के समन्वय का भी प्रतीक है। लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, सामूहिक उपवास और शिव आराधना के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया जाता है।

“आयोजन को सफल बनाने में समिति की रही अहम भूमिका”

मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी देवेंद्र प्रकाश सहित समाजसेवी एवं भाजपा नेता उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार साहू ने कहा कि मंडा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

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